ये है खाटूश्यामजी का मूल स्वरूप, भाग्यशाली लोगों को ही मिलते हैं ऐसे दर्शन! आप भी कर लीजिए
विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में भारत से ही नहीं विदेशों से भक्त बाबा श्याम के दर्शन के लिए आते हैं. ऐसे में आज बसंत पंचमी के दिन बाबा का श्रृंगार पीले रंग के फूलों से किया गया है. आज लखदातार श्याम बाबा पूर्ण शालिग्राम (काला रंग) के रूप में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं. बताया जाता है, कि इस रूप में बाबा श्याम 7 दिन ही दर्शन देते हैं, ऐसे में आज बसंत पंचमी के दिन क्या कुछ खास होने वाला है, चलिए आपको बताते हैं, और बाबा के दर्शन भी करवाते हैं.
पीले फूलों से सजे बाबा श्याम
खाटूश्याम जी मंदिर के मुख्य पुजारी मंदिर मोहनदास महाराज ने बताया, कि आज बाबा का श्रृंगार पीले रंग के फूलों से किया गया है. बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के फूलों से सजे बाबा श्याम भक्तों को बहुत आकर्षित कर रहे हैं. मंदिर महंत ने बताया, कि लखदातार आज श्याम पूर्ण शालिग्राम (काला रंग) के रूप में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं. यह बाबा श्याम का मूल स्वरूप है. इस रूप में बाबा श्याम एक महीने में मात्र 7 दिन ही दर्शन देते हैं.
बसंत पंचमी नहीं है कोई पीला वस्त्र बांटने की परंपरा
आपको बता दें, कि आज बसंत पंचमी होने की वजह से खाटूश्याम जी मंदिर में भक्तों की संख्या सुबह से ही बढ़ गई है. मंदिर कमेटी और प्रशासन द्वारा भक्तों की सहूलियत के लिए अनेकों व्यवस्थाएं भी की गई हैं. भीड़ ज्यादा रहने की वजह से भक्त 14 दर्शन लाइनों में लगकर बाबा के दर्शन कर रहे हैं. वहीं शाम को संध्या आरती के समय भी बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया जाएगा. वहीं मंदिर कमेटी ने पत्र जारी कर बताया है, कि बसंत पंचमी पर किसी प्रकार का पीला वस्त्र वितरण नहीं किया जाएगा. श्री श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष पृथ्वी सिंह चौहान ने बताया, कि बसंत पंचमी पर श्री श्याम मंदिर खाटूश्यामजी में पीला वस्त्र बांटने की किसी प्रकार की कोई परंपरा नहीं है, और ना ही बसंत पचंमी पर्व पर पीला वस्त्र बांटने का कोई कार्यक्रम रखा गया है.
कौन हैं बाबा श्याम
आपको जानकारी के लिए बता दें, पौराणिक कथाओं के अनुसार, हारे के सहारे बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे. बर्बरीक के पास तीन ऐसी तीर थे, जो पूरे युद्ध को पलट सकते थे. इसी को लेकर भगवान कृष्ण ब्राह्मण के रूप में आए और उनसे शीश दान में मांग लिया. बर्बरीक ने भी बिना संकोच किए भगवान कृष्ण को अपना शीश दान में दे दिया. ऐसी मान्यता है, कि तब भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक को कहा कि ” बर्बरीक तुम्हें कलयुग में श्याम के नाम से पूजा जाएगा, तुम्हें लोग मेरे नाम से पुकारेंगे और तुम अपने भक्तों के हारे का सहारा बनोगें
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