'केवल आतंकियों के खात्मे से मिलेगा इंसाफ' – ओवैसी ने पहलगाम हमले पर दी प्रतिक्रिया
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन में मंगलवार को हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इन आतंकयों के खात्मे से ही उन लोगों के परिवार को न्याय मिलेगा, जिनकी इसमें हत्या हुई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'एक ऐसी जगह जहां इतने सारे पर्यटक थे, वहां एक भी पुलिस कर्मी या सीआरपीएफ कैंप नहीं था। क्विक रिएक्शन टीम (QRT) को मौके पर पहुंचने में एक घंटे से अधिक का समय लगा और इन कमीनों-हरमजादों ने लोगों से उनका धर्म पूछने के बाद उन्हें गोली मार दी।'
ओवैसी ने उठाए सवाल?
उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तान से आए थे और पाकिस्तान उनका समर्थन करता है। वे सीमा कैसे पार कर गए? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? वे पहलगाम पहुंचे गए तो श्रीनगर भी पहुंच सकते थे... न्याय तभी होगा जब जवाबदेही तय होगी... हम आतंकी हमले की निंदा करते हैं।
पीएम से सर्वदलीय बैठक का आग्रह
बता दें कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि पहलगाम सर्वदलीय बैठक के लिए संसद में सदस्यों की संख्या की परवाह किए बिना सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया जाए।
ओवैसी ने रिजिजू से की फोन पर बात
ओवैसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने बुधवार रात केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से बात की और उन्हें बताया गया कि एनडीए सरकार केवल 'पांच या 10 सांसदों' वाले दलों को आमंत्रित करने पर विचार कर रही है।
ओवैसी ने यह भी कहा कि जब उन्होंने पूछा कि कम सांसदों वाले दलों को क्यों नहीं? तो केंद्रीय मंत्री ने जवाब दिया कि बैठक 'बहुत लंबी' हो जाएगी और उन्होंने मजाक किया कि एआईएमआईएम नेताओं की आवाज वैसे भी बहुत तेज है।
गुरुवार शाम को होने वाली बैठक में केंद्र विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को पहलगाम आतंकी हमले के बारे में जानकारी देगा और उनके विचार सुनेगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह नेताओं को जानकारी देंगे। सिंह बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
आतंकवादियों को करारा जवाब जरूरी
ओवैसी ने कहा कि यह भाजपा या किसी अन्य पार्टी की आंतरिक बैठक नहीं है, बल्कि आतंकवाद और आतंकवादियों को पनाह देने वाले देशों के खिलाफ एक मजबूत और एकजुट संदेश भेजने के लिए एक सर्वदलीय बैठक है। क्या नरेंद्र मोदी सभी दलों की चिंताओं को सुनने के लिए एक घंटा अतिरिक्त नहीं दे सकते?
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