बैंकों की सुरक्षा सर्वोपरि! भारत विदेशी स्वामित्व की 15% सीमा से कोई समझौता नहीं करेगा: संजय मल्होत्रा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कर दिया है कि फिलहाल भारतीय बैंकों में विदेशी स्वामित्व की मौजूदा 15 फीसदी की सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की तरफ से बैंकों के स्वामित्व ढांचे और पात्रता से जुड़े मानकों की समीक्षा की जा सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की भावी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस सीमा पर पुनर्विचार किया जा सकता है.
अभी क्यों नहीं होगा बदलाव?
संजय मल्होत्रा ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल ऐसे दौर में है, जहां ऐसे बैंक मालिकों और प्रबंधकों की जरूरत है, जो विश्वसनीय हों. हालांकि, इसके कुछ अपवाद मौजूद हैं, लेकिन मौजूदा नीति में कोई तत्काल परिवर्तन नहीं होगा. मल्होत्रा ने यहां आरबीआई मुख्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि रिजर्व बैंकों में स्वामित्व ढांचे और पात्रता मानदंड जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है.
केस-टू-केस बदलाव संभव
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि मोटे तौर पर फिलहाल विदेशियों को भारतीय बैंकों में 15 फीसदी ऑनरशिप की अनुमति दी गई है. हालांकि, इस सीमा में केस-टू-केस भी फैसला किया जाता है. किसी मामले में अपवाद के रूप में यह सीमा 15 फीसदी से ऊपर भी जा सकती है. लेकिन, नियमों के रूप में इस मामले में किसी तरह के बदलाव का इरादा नहीं हैं.
ये मामले हैं अपवाद
सीएसबी बैंक में कनाडा की निवेशक फर्म फेयरफैक्स को 51 फीसदी हिस्सेदारी रखने की अनुमति दी गई है. इसके अलावा हाल ही में जापान के एसएमबीसी को यस बैंक में 20 फीसदी हिस्सेदारी रखने की अनुमति दी गई है.
इकोनाॅमी के हित में फैसला
संजय मल्होत्रा ने कहा कि कि बैंकों के स्वामित्व ढांचे और पात्रता की शर्तों पर फिर से विचार कर सकते हैं. इस दौरान विदेशी स्वामित्व की सीमा को 15 फीसदी से ज्यादा करने की समीक्षा की जा सकती है. लेकिन, फिलहाल यह काम तुरंत नहीं होगा, इसमें समय लगेगा. मल्होत्रा ने आखिर में यह फैसला अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, हमें अधिक बैंकों की जरूरत है. इसे ध्यान में रखते हुए, यदि स्वामित्व मानदंडों में बदलाव की जरूरत होगी, तो हम ऐसा जरूर करेंगे.
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