रजिस्ट्री रिकॉर्ड की पड़ताल से फर्जी पैन का जाल टूटेगा, आयकर विभाग ने तेज की जांच
व्यापार: बेहिसाब संपत्ति व बेनामी लेनदेन पर रोक लगेगी। आयकर विभाग संपत्ति रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड की जांच करने की योजना बना रहा है। हजारों संपत्ति सौदे आयकर अधिकारियों की नजरों से ओझल होने की आशंका है।
रिपोर्टिंग में जानबूझकर की गई चूक और संपत्ति के दस्तावेजों में खरीदारों-विक्रेताओं के फर्जी या भ्रामक पैन के कारण कई लेन-देन विभाग की नजर से ऐसे सौदे बच रहे हैं। संपत्ति रजिस्ट्रार को 30 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्तियों की खरीद और बिक्री का विवरण देना अनिवार्य है।
ऐसे मामले भी हैं जिनमें शामिल पक्ष रजिस्ट्रार कार्यालयों के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके यह सुनिश्चित करते हैं कि सौदे की रिपोर्ट न की जाए या गलत पैन या नाम दर्ज कर दिए जाएं। इससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाएगा। उच्च मूल्य वाले रियल एस्टेट लेनदेन का उपयोग लंबे समय से काले धन को जमा करने के एक माध्यम के रूप में किया जाता रहा है। इसे अक्सर फर्जी संस्थाओं के माध्यम से छुपाया जाता है।
इस प्रणाली को मजबूत करने के लिए संपत्ति पंजीकरण से पहले सभी पक्षों के लिए पैन और आधार का अनिवार्य ई-सत्यापन एक महत्वपूर्ण सुधार है। यह कदम नकली या गलत पैन या आधार विवरणों के उपयोग को समाप्त करने और यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि संपत्ति के रिकॉर्ड वास्तविक स्वामित्व को दर्शाते हैं। इस साल की शुरुआत में आयकर विभाग ने बिना जमीन के 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की कृषि आय दिखाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं पर नजर रखने के लिए राष्ट्रव्यापी जांच की।
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