दूरस्थ अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच हुई सुनिश्चित, सुरक्षित मातृत्व की ओर बढ़ रहे कदम
रायपुर : विकासखंड के ग्राम पंचायत बड़गांव की लीली कुजुर के पति मजदूरी करते हैं। जब वह दूसरी बार गर्भवती हुईं, तब परिवार में सुरक्षित प्रसव को लेकर अनेक चिंताएँ थीं। सीमित साधन और ग्रामीण परिस्थितियों के बावजूद लीली चाहती थीं कि प्रसव के दौरान किसी प्रकार की परेशानी या जोखिम न आए।
गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों और मितानिनों ने उन्हें नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनकी सलाह पर लीली ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, लेमरू में अपना संपूर्ण उपचार कराने का निर्णय लिया। प्रसव पीड़ा बढ़ने पर परिवार
ने तत्क्षण छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित 102 एंबुलेंस सेवा को संपर्क किया।
रात लगभग 12 बजे उन्हें अस्पताल लाया गया, जहाँ उपलब्ध चिकित्सकों और चिकित्सा स्टाफ ने पूरी तत्परता से उनका सुरक्षित प्रसव कराया। लीली ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया, जिसका वजन 2 किलो 400 ग्राम था।
लीली बताती हैं कि उनके पति बाहर राज्य में मजदूरी करते हैं, परंतु लेमरू के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध संपूर्ण सुविधाओं ने उन्हें सुरक्षित मातृत्व का भरोसा दिया।
दूरस्थ अंचल में स्थित यह स्वास्थ्य केंद्र आसपास के अनेक गांवों के लिए जीवनदायिनी सुविधा है। यहाँ चिकित्सा सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहती हैं और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपचार के लिए आते हैं।
इसी स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराने वाली हेमा भी अपनी सकारात्मक अनुभव बताती हैं। उन्होंने बताया कि उनका प्रसव भी सुरक्षित रूप से यहीं हुआ और बच्चे का वजन 3 किलो 100 ग्राम था। गांव की मितानिनों और स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा उन्हें केंद्र की सुविधाओं और सुरक्षित प्रसव के बारे में लगातार जानकारी दी गई थी। गर्भावस्था के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना अंतर्गत 9 और 28 सप्ताह में महिला चिकित्सक से नियमित जांच भी कराई।
लेमरू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र न केवल स्वास्थ्य सुविधा का केंद्र है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए सुरक्षित मातृत्व का मजबूत सहारा बन चुका है। लीली और हेमा जैसी अनेक महिलाओं की यह कहानी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सच्ची सफलता को दर्शाती है।
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