जोगिंदर सिंह: वह बेबाक सीबीआई डायरेक्टर जिसकी ईमानदारी ने हिला दी थी सरकार की नींव
नई दिल्ली । भारतीय पुलिस सेवा और जांच एजेंसियों के इतिहास में 1961 बैच के कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी जोगिंदर सिंह का नाम एक ऐसे अध्याय की तरह दर्ज है, जिसने यह साबित किया कि यदि एक अफसर ठान ले, तो सत्ता के गलियारों में बैठे दिग्गजों की नींद उड़ सकती है। 90 के दशक में अपनी बेबाकी और निडरता के कारण टाइगर के नाम से मशहूर हुए जोगिंदर सिंह सीबीआई के 17वें डायरेक्टर थे। उनके कार्यकाल ने न केवल चारा घोटाले जैसे बड़े मामलों को अंजाम तक पहुँचाया, बल्कि भारतीय नौकरशाही को एक ऐसा दौर दिखाया जब एक मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी की फाइल पर साइन करने की कीमत एक डायरेक्टर को अपनी कुर्सी गंवाकर चुकानी पड़ी।
जोगिंदर सिंह के करियर का सबसे चर्चित और विवादित मोड़ वह रहा, जिसे भारतीय प्रशासनिक इतिहास का सबसे अपमानजनक ट्रांसफर माना जाता है। 30 जून 1997 को जब सिंह पेरिस से दिल्ली लौट रहे थे, तब वे जमीन से 30,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे थे। उन्हें इस बात का आभास भी नहीं था कि दिल्ली में उनके तबादले का आदेश टाइप हो चुका है। तकनीकी खराबी के कारण उनकी फ्लाइट देर से पहुंची और जब वे 1 जुलाई की सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे, तो उन्हें रिसीव करने आए एक कनिष्ठ अधिकारी ने कान में फुसफुसाते हुए बताया, सर, अब आप सीबीआई डायरेक्टर नहीं रहे। सरकार ने उन्हें आनन-फानन में गृह मंत्रालय के पेंशन और स्वतंत्रता सेनानी विभाग में भेज दिया था। उनकी विदाई की पटकथा चारा घोटाले की जांच के दौरान ही लिख दी गई थी। 950 करोड़ रुपये के इस घोटाले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव मुख्य आरोपी थे। जोगिंदर सिंह ने बिना किसी राजनीतिक दबाव की परवाह किए लालू यादव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने और उनकी गिरफ्तारी को हरी झंडी दे दी थी। उन्होंने अपने मातहत अधिकारी यू.एन. बिस्वास को पूरी छूट दे रखी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल अपनी सरकार बचाने के लिए लालू यादव को नाराज नहीं करना चाहते थे, लेकिन सिंह के सख्त रुख ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया था।
प्रधानमंत्री गुजराल की नाराजगी का एक और कारण सिंह का मीडिया के प्रति प्रेम था। वे अक्सर सरकार को ब्रीफ करने से पहले प्रेस को बयान दे देते थे, जिससे सरकार को कई बार असहज होना पड़ता था। इसके अलावा, सिंह ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी की संपत्तियों की जांच शुरू करवा दी थी और उनके घर जाकर पूछताछ की थी। बोफोर्स मामले में राजीव गांधी का नाम चार्जशीट के ड्राफ्ट में शामिल होने की खबरों ने आग में घी का काम किया। कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के दबाव में अंततः सरकार ने उन्हें हटाने का फैसला कर लिया। रिटायरमेंट के बाद जोगिंदर सिंह ने इनसाइड सीबीआई जैसी कई किताबें लिखीं, जिनमें उन्होंने खुलासा किया कि कैसे लालू यादव को बचाने के लिए पीएमओ से उन पर दबाव डाला गया था। उन्होंने बोफोर्स केस, यूरिया घोटाला और जैन हवाला डायरी जैसे बड़े मामलों की चुनौतियों पर भी विस्तार से लिखा। उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन टाइगर के रूप में उनकी पहचान आज भी उन अधिकारियों के लिए प्रेरणा है जो राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर देते हैं।
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