प्रदेश में तापमान उछला, मार्च जैसा एहसास; इन जिलों में बरसात की संभावना
लखनऊ|उत्तर प्रदेश में तापमान में हल्की मगर लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। दिन चढ़ने के साथ तेज धूप अब सर्दी की विदाई का संकेत देने लगी है। दोपहर में तपिश साफ महसूस हो रही है, हालांकि सुबह और देर शाम हल्की ठंड अभी कायम है। प्रदेश में मौसम बिल्कुल साफ है। सुबह सात बजे से साफ और चटख धूप आसमान में देखने को मिल रही है। बृहस्पतिवार को लगातार तीसरे दिन बांदा प्रदेश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया। यहां अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रयागराज में 30.4 डिग्री और वाराणसी में 29.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। आगरा और झांसी में भी दोपहर के समय तेज धूप ने लोगों को गर्मी का अहसास कराया। बदलते मौसम ने ठंड के असर को धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है।मौसम विभाग के मुताबिक 17 फरवरी के आसपास पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक हल्का पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसके प्रभाव से कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की संभावना है।मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगभग दो डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। इससे दिन की गर्मी और बढ़ेगी, जबकि रात के तापमान में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल प्रदेश पर किसी बड़े मौसमी तंत्र या सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव नहीं है, जिसके कारण मौसम साफ और शुष्क बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी।अगले सप्ताह कई स्थानों पर हो सकती है बारिश उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के महानिदेशक डा. संजय सिंह की अध्यक्षता में बृहस्पितवार को हुई क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की बैठक में किसानों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। इस दौरान राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की ओर से विकसित पोर्टल का उद्घाटन भी किया गया। इस दौरान मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि अगले सप्ताह कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है।बैठक में मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बताया गया कि 17 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है। परिषद ने किसानों को सलाह दी है कि वे रबी फसलों में नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। जनवरी में बोई गई गेहूं की फसल में उचित नमी की दशा में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग सुनिश्चित करें। कृषि विशेषज्ञों ने विभिन्न फसलों के लिए विशिष्ट प्रबंधन तकनीकें साझा की हैं।
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