नई दिल्ली। असम (Assam), केरल (Kerala) और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव (Puducherry Assembly Elections) के लिए प्रचार थम चुका है और 9 अप्रैल को मतदान (Voting) होना है। इन चुनावों में जहां असम में बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच सीधा मुकाबला है, वहीं केरल में वाम मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच टक्कर है। दोनों राज्यों में मुस्लिम मतदाता (Muslim Voters) निर्णायक भूमिका में हैं, जिसके चलते मुस्लिम राजनीति से जुड़े दलों की भी असली परीक्षा मानी जा रही है। देश में मुस्लिम आबादी भले 14-15 प्रतिशत के आसपास हो, लेकिन केरल में यह करीब 27 प्रतिशत और असम में 34-35 प्रतिशत तक है। यही वजह है कि इन राज्यों में मुस्लिम वोट बैंक चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

असम में बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) और केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की सियासी पकड़ इस चुनाव में कसौटी पर है। केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के साथ गठबंधन में है, जबकि असम में AIUDF और कांग्रेस अलग-अलग मैदान में हैं।

असम में अजमल की चुनौती
असम की 126 विधानसभा सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन बदरुद्दीन अजमल की पार्टी केवल 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी मुख्य रूप से निचले असम के उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं और कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

2021 के चुनाव में कांग्रेस और AIUDF साथ थे, लेकिन इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में अजमल को बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी सीधी टक्कर मिल रही है। धुबरी, बारपेटा और गोलपाड़ा जैसे इलाकों में मुकाबला खास तौर पर दिलचस्प है। पिछली बार AIUDF ने 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं।अजमल ने 2005 में AIUDF की स्थापना की थी और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के मुद्दों को लेकर अपनी राजनीति मजबूत की। 2006 में 10 सीटों से शुरू हुई पार्टी 2021 तक 16 सीटों तक पहुंची, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में अजमल की हार ने पार्टी को झटका दिया। अब 2026 का चुनाव उनके लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

मुस्लिम वोट किसके साथ?
असम में परिसीमन के बाद मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों की संख्या घटकर 32 से 22 रह गई है। ऐसे में मुस्लिम वोटों के बंटवारे का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ेगा। कांग्रेस और AIUDF दोनों की नजर इस वोट बैंक पर टिकी है। 2024 लोकसभा चुनाव के संकेत बताते हैं कि मुस्लिम मतदाता का रुझान बदल रहा है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।

केरल में मुस्लिम लीग की स्थिति
केरल में मुस्लिम राजनीति मुख्य रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के इर्द-गिर्द घूमती है। यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन का अहम हिस्सा है और 140 में से 26 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरण तय करते हैं। IUML का इन क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रहा है और मलप्पुरम को उसका गढ़ माना जाता है।

केरल विधानसभा में 32 मुस्लिम विधायक हैं, जिनमें सबसे ज्यादा IUML के हैं। राज्य की 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पिछले कई दशकों से IUML ने मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ बनाए रखी है, खासकर कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण वोटों का बिखराव नहीं होता।

इस बार केरल में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच मुकाबले में यूडीएफ का पलड़ा थोड़ा भारी माना जा रहा है, जिससे मुस्लिम लीग को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, असम और केरल दोनों ही राज्यों में मुस्लिम वोट बैंक चुनावी नतीजों की दिशा तय कर सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि असम में बदरुद्दीन अजमल अपनी पकड़ बरकरार रख पाते हैं या नहीं, और केरल में मुस्लिम लीग अपना वर्चस्व कायम रखती है या नहीं।