ट्रैफिक मैनेजमेंट कमजोर, रेवेन्यू बढ़ाने पर प्रशासन का फोकस
एमपी नगर की ट्रैफिक व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है।
भोपाल के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल एमपी नगर की ट्रैफिक व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों और रोजाना आने-जाने वाले वाहन चालकों का आरोप है कि यहां ट्रैफिक को सुचारु बनाने से ज्यादा ध्यान रेवेन्यू वसूली और चालान कार्रवाई पर दिया जा रहा है। यही वजह है कि इलाके में रोजाना सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और जाम की स्थिति सामान्य हो चुकी है।

ट्रैफिक स्टाफ केवल चालान करते हुए नजर आता है
कई स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस के नाके लगाए जाते हैं, जहां सिपाही मुख्य रूप से वाहन रोककर चालान काटने में मुस्तैद नजर आते हैं। लेकिन जब सड़कों पर जाम की स्थिति बिगड़ती है, तब उसे खुलवाने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल दिखाई नहीं देता। हालात ऐसे बन जाते हैं कि बस कंडक्टरों और आम नागरिकों को खुद वाहन से उतरकर ट्रैफिक संभालना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी सबसे ज्यादा जरूरी होती है, वहीं जिम्मेदार अधिकारी अक्सर सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों—यहां तक कि ड्राइवर मौजूद होने के बावजूद—उनके चालान काटने में व्यस्त रहते हैं। इससे जाम और अव्यवस्था की समस्या और बढ़ जाती है।
जिम्मेदार अधिकारियों को जमीनी हकीकत से कोई खास फर्क पड़ता नहीं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि एमपी नगर जैसे महत्वपूर्ण कारोबारी और कार्यालयीन क्षेत्र में ट्रैफिक प्रबंधन की प्राथमिकता आखिर क्या है—व्यवस्था सुधारना या सिर्फ चालान के जरिए राजस्व बढ़ाना?रोजाना जाम से जूझ रहे लोगों का कहना है कि ट्रैफिक प्रभा री और जिम्मेदार अधिकारियों को जमीनी हकीकत से कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा, जिसके चलते क्षेत्र की व्यवस्था दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
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