राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट, महासंघ ने दी हड़ताल की चेतावनी
राजस्थान में कर्मचारी आंदोलन की आहट: RGHS और भुगतान रोकने पर महासंघ ने सरकार को घेरा
जयपुर। राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कर्मचारी महासंघ ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई है।
टकराव के मुख्य कारण
कर्मचारी संगठनों के आक्रोश के पीछे दो प्रमुख मुद्दे हैं:
1. ठप पड़ी RGHS योजना (स्वास्थ्य सुविधा) आंदोलन की सबसे बड़ी वजह राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) का प्रभावी रूप से बंद होना है।
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निजी अस्पतालों का इनकार: पिछले एक माह से कई निजी अस्पतालों ने इस योजना के तहत उपचार देना बंद कर दिया है।
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मरीजों की बेबसी: वेतन से नियमित कटौती के बावजूद कर्मचारियों को दवाइयों और गंभीर बीमारियों (कैंसर, किडनी रोग) के इलाज के लिए निजी खर्च उठाना पड़ रहा है।
2. लीव एनकैशमेंट (अवकाश भुगतान) पर रोक महासंघ के अनुसार, कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने या अन्य स्थितियों में मिलने वाले 'लीव एनकैशमेंट' के भुगतान पर अघोषित रोक लगा दी गई है। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के एक महीने बाद भी यह राशि जारी नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
महासंघ की दो टूक चेतावनी
महासंघ के उपाध्यक्ष अजयवीर सिंह और अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। संगठन की प्रमुख मांगें हैं:
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निजी अस्पतालों में RGHS के तहत तुरंत कैशलेस इलाज बहाल किया जाए।
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रुके हुए अवकाश भुगतान (Leave Encashment) को अविलंब जारी किया जाए।
आंदोलन की रणनीति
प्रतिनिधिमंडल में देवेन्द्र सिंह नरूका, ओमप्रकाश चौधरी, बहादुर सिंह और शशि शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। महासंघ ने संकेत दिया है कि यदि अगले कुछ दिनों में सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा।
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