महाकुंभ में अखाड़ों और महामंडलेश्वर के शिविर में बढ़ी बटुकों की मांग
प्रयागराज । महाकुम्भ भारतीय संस्कृति का महापर्व है। आध्यात्मिकता के साथ सामाजिकता का भाव समेटे यह आयोजन विभिन्न रूपों में प्रकट होता है, जिसका मूलाधार हैं वेद। इन्हीं वेदों की वाणी प्रयागराज महाकुंभ में भी गूंजेगी। महाकुम्भ क्षेत्र में संतों के विभिन्न शिविर इसके साक्षी होंगे। योगी सरकार जनवरी 2025 में आयोजित होने जा रहे महाकुम्भ को दिव्य और भव्य स्वरूप प्रदान कर रही है। महाकुम्भ क्षेत्र में साधु संतों और अखाड़ों के भव्य शिविर आकार लेने लगे हैं। एक तरफ जहां इन शिविरों को व्यवस्थित स्वरूप देने में मेला प्रशासन लगा हुआ है तो वहीं साधु संत अपने अपने शिविरों को वैदिक संस्कृति के ताने बाने में पिरोने में लगे हैं।
इस बार यहां वेदों की ऋचाएं भी गूंजेगी
धर्माचार्यों और अखाड़ों के महामण्डलेश्वरों के शिविरों में नियमित रूप से कथा, भागवत और प्रवचन की त्रिवेणी के साथ वेद मंत्रों की गंगा प्रवाहित करने की कवायद चल रही है। वेद विद्यालयों में अध्ययन करने वाले बटुकों की वेद पाठ के लिए अग्रिम व्यवस्था की जा रही है। स्वामी नरोत्तमानंद गिरी वेद विद्यालय झूंसी के प्राचार्य ब्रज मोहन पांडेय का कहना है कि इस आयोजन से भारत की वैदिक संस्कृति को प्रचार प्रसार और नई पीढ़ी को समझने का अवसर मिलेगा। महाकुम्भ के अखाड़ों में सामान्य तौर पर साधक और साधना की विभिन्न क्रियाएं ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को देखने को मिलती हैं। लेकिन इस बार यहां वेदों की ऋचाएं भी गूंजेगी। श्री पंच अग्नि अखाड़े के महा मंडलेश्वर सोमेश्वरानंद ब्रह्मचारी कहते हैं कि वैदिक संस्कृति को विस्तार देने के लिए अखाड़ों में वेद पाठ करने वाले बटुकों को वेद पाठ के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
इस बार वेदों की वाणी को भी अहम जगह मिलेगी
महामंडलेश्वरों के शिविर में कथा वाचकों के प्रवचन और भजन कीर्तन चलते रहते हैं जिसमें इस बार वेदों की वाणी को भी अहम जगह मिलेगी। पंचायती अखाड़ा महा निर्वाणी के महा मंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती बताते हैं कि उनके शिविर में पांच लाख पञ्चमाक्षर का जाप प्रतिदिन 8 ब्राह्मण करेंगे। वेदों के ऋचाओं का पाठ भी शिविर में होगा। महाकुम्भ क्षेत्र में वेद का अध्ययन करने वाले 20 हजार से अधिक बटुकों की आवश्यकता होगी। प्रयागराज जनपद में सरकारी वेद पाठ शालाओं की बात करें तो यहां पाठशाला योजना के अंतर्गत पांच वेद विद्यालय और गुरु शिष्य इकाई के रूप में 3 वेद विद्यालय होंगे। इन सभी वेद विद्यालयों को महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड चलाता है। अलोपी बाग स्थित श्री भारती तीर्थ वेद शाला के प्राचार्य हरि ओम द्विवेदी का कहना है कि वेद विद्यालय के बटुकों को महाकुम्भ क्षेत्र में वेद पाठ के लिए बोर्ड से अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति मिल जाने पर उन्हें यह जिम्मेदारी दी जाएगी।
IND vs SA Super-8: अभिषेक शर्मा नहीं ये प्लेयर हो सकता है बाहर, साउथ अफ्रीका के खिलाफ ऐसी होगी भारत की प्लेइंग 11
Holi Special Train: छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों को बड़ी सौगात! होली पर चलेंगी 6 जोड़ी स्पेशल ट्रेन, दिल्ली-बिहार जाना होगा आसान
Jabalpur: जबलपुर में तेज रफ्तार एमजी हेक्टर ने बरपाया कहर, पुलिसकर्मी समेत तीन लोगों को मारी टक्कर
शहर के लॉज पर पुलिस की रेड, आपत्तिजनक गतिविधियों में लिप्त 18 लोग हिरासत में
SIR के बाद जांचें नई वोटर लिस्ट में आपका नाम, जिले से 44 हजार से ज्यादा मतदाता हटे
नगर पालिका में ईओडब्ल्यू की दबिश, अध्यक्ष, CMO सहित कर्मचारी दफ्तर से भागे
भारत की ऐतिहासिक सफलता, 88 देशों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट’ पर किए हस्ताक्षर