अत्यधिक चीनी का सेवन बढाती है कई बीमारियों का जोखिम
नई दिल्ली । हमारे खान-पान की आदतें ऐसी हो गई हैं कि शरीर में जरूरत से ज्यादा चीनी पहुंच रही है, और हम इसका अंदाजा तक नहीं लगा पाते। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (उत्तर प्रदेश) ने एक जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को चीनी के सीमित सेवन की सलाह दी है। उनका कहना है कि अत्यधिक चीनी का सेवन डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकता है।
हमारी रोजमर्रा की डाइट में कई ऐसे खाद्य और पेय पदार्थ शामिल हैं, जिनमें छिपी हुई चीनी होती है। एक 300 मिलीलीटर की सॉफ्ट ड्रिंक में 31.8 ग्राम चीनी और 132 कैलोरी होती है। इसी तरह चॉकलेट पेस्ट्री में 12 ग्राम चीनी और 297 कैलोरी, फ्लेवर्ड जूस में 46.8 ग्राम चीनी और 189 कैलोरी, चॉकलेट में 25 ग्राम चीनी और 100 कैलोरी, और एक गुलाब जामुन में 32 ग्राम चीनी व 254 कैलोरी पाई जाती है। यह आंकड़े बताते हैं कि अनजाने में ही हम अपनी जरूरत से कहीं ज्यादा चीनी का सेवन कर रहे हैं। भारत में चीनी का सांस्कृतिक महत्व भी रहा है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में खानपान की आदतों में बड़ा बदलाव आया है। वैश्वीकरण और प्रोसेस्ड फूड्स की उपलब्धता के चलते कोल्ड ड्रिंक, मिठाइयां और पैकेज्ड स्नैक्स का सेवन तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर दिख रहा है। खासकर मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज के मामलों में तेजी आई है। एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर और बच्चों को भी उसकी आदत डालकर, हम न केवल खुद को, बल्कि अगली पीढ़ी को भी गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सुझाव देता है कि दैनिक कैलोरी का केवल 5-10 प्रतिशत हिस्सा ही मुक्त चीनी से आना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए हमें अपने खान-पान में फल, सब्जियां और साबुत अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए। अगर समय रहते चीनी के सेवन पर नियंत्रण न किया जाए तो यह जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियों को जन्म दे सकता है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि लोग पैक्ड खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ें, सॉफ्ट ड्रिंक की जगह नींबू पानी या बिना चीनी वाला फ्रेश जूस लें, संतुलित आहार अपनाएं और नियमित व्यायाम करें।
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